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16 साल से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग में ‘नो एंट्री’ उल्लंघन करने पर लगेगा जुर्माना, गाइडलाइन जारी

भारत सरकार ने 16 जनवरी 2024 को कोचिंग संस्थानों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। बच्चों को नीट और जेईई की तैयारी करा रहे उनके माता पिता और प्राइवेट संस्थानों को केंद्र सरकार ने एक बड़ा झटका का दिया है। जी हां प्राइवेट कोंचिंग सेंटर्स की मनमानी पर अब केंद्र सरकार ने लगाम कसने की तैयारी कर ली है।

सरकार की नई गाइडलाइंस के अनुसार अब कोई भी कहीं भी और कभी भी प्राइवेट कोचिंग सेंटर नहीं खोल पाएगा। इसके लिए सबसे पहले उसे रजिस्ट्रेशन कराना होगा, यही नहीं अब कोचिंग सेंटर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को पढ़ाई के लिए नामांकन नहीं होगा। कोचिंग सेंटर किसी छात्र से मनमानी फीस भी नहीं वसूल सकेंगे।

इसके अलावा इन दिशानिर्देशों के अनुसार, कोचिंग संस्थान स्नातक से कम योग्यता वाले शिक्षकों को नियुक्त नहीं कर सकते हैं। कोचिंग संस्थान विद्यार्थियों के नामांकन के लिए माता-पिता को भ्रामक वादे या रैंक या अच्छे अंक की गारंटी नहीं दे सकते हैं। संस्थान 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन भी नहीं कर सकते हैं। विद्यार्थियों का कोचिंग संस्थान में नामांकन माध्यमिक विद्यालय परीक्षा के बाद ही होना चाहिए।

केंद्र ने ये गाइलाइन देश भर में छात्रों के बढ़ते सुसाइड मामलों और देश में बेलगाम कोचिंग सेंटर्स की मनमानी को लेकर दिया है। गाइडलाइन के अनुसार, आईआईटी जेईई, एमबीबीएस, नीट जैसे प्रोफेशनल कोर्स के लिए कोचिंग सेंटरों के पास फायर और भवन सुरक्षा संबंधी एनओसी होनी चाहिए। इसके साथ ही परीक्षा और सफलता के दबाव  को लेकर छात्रों की परेशानी दूर करने के लिए उन्हें मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए।

यही नहीं कोचिंग संस्थानों पर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है या अत्यधिक शुल्क वसूलने पर उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जा सकता है।

सरकार का यह फैसला कोचिंग संस्थानों में छात्रों के आत्महत्या के बढ़ते मामलों, आग की घटनाओं, सुविधाओं की कमी के साथ-साथ उनके द्वारा अपनाई जाने वाली शिक्षण पद्धतियों के बारे में सरकार को मिली शिकायतों के बाद लिया गया है।

कोचिंग सेंटर्स के नए नियम और रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ शर्तें

  • कोई भी कोचिंग सेंटर ऐसे ट्यूटर को नहीं रखेगा, जिनकी क्वालिफिकेशन ग्रेजुएशन से कम हो।
  • कोचिंग सेंटर माता-पिता/छात्रों को एडमिशन के लिए भ्रामक वादे या रैंक या अच्छे नंबर लाने की गारंटी नहीं देंगे।
  • कोचिंग 16 साल से कम उम्र के स्‍टूडेंट्स का इनरोलमेंट नहीं कर सकते हैं।
  • हर कोर्स की ट्यूशन फीस निर्धारित होगी और इसमें किसी भी स्थिति में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी.इसके साथ ही,रसीद भी देना होगा।
  • यदि कोई छात्र या छात्रा किसी कोर्स को तय अवधि के बीच में छोड़ रहा है हैं,तो इंस्टीट्यूट को 10 दिनों के भीतर बची हुई फीस वापस करनी होगी.इसके साथ ही, जो छात्र हॉस्टल में रह रहे हैं, उन्हें हॉस्टल फीस और मेस फीस भी वापस करनी होगी।
  • कोचिंग सेंटर को अपनी वेबसाइट पर फैकल्‍टी की योग्यता, कोर्स पूरा होने की अवधि, हॉस्‍टल सुविधाओं और फीस की पूरी जानकारी देनी होगी।
  • कोचिंग को बच्‍चों को होने वाले मेंटल स्‍ट्रेस पर ध्‍यान देना होगा और क्‍लासेज में उनपर अच्‍छे परफॉर्मेंस का प्रेशर नहीं बनाया जाएगा।
  • कोचिंग सेंटर्स में साइकोलॉजिकल काउंसलिंग के लिए प्रॉपर चैनल हो. साइकोलॉजिस्ट, काउंसलर के नाम और वर्किंग टाइम की जानकारी पेरेंट्स को देनी होगी।
  • ट्यूटर भी स्‍टूडेंट्स को गाइडेंस देने के लिए मेंटल हेल्‍थ के टॉपिक्‍स में ट्रेनिंग ले सकते है।
  • कोचिंग सेंटर टेस्ट से पहले स्टूडेंट्स को उस टेस्ट के डिफिकल्टी लेवल के बारे में बताएं. उन्हें अन्य करियर ऑप्शन्स के बारे में भी बताया जाए।
  • मेंटल हेल्थ को लेकर समय-समय पर वर्कशॉप का आयोजन किया जाए. साथ ही दिव्यांग स्टूडेंट्स को सपोर्ट करने के लिए कोचिंग उन्हें उनके मुताबिक सुविधाएं प्रदान करे।
  • 1 लाख रुपए तक का जुर्माना
    शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, कोचिंग सेंटर्स को गाइडलाइंस का पालन करना होगा.अगर कोई कोचिंग सेंटर इन निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसे 1 लाख रुपए तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर कोचिंग सेंटर अपने छात्रों से अधिक फीस वसूलता है, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। साथ ही,जिस कोचिंग सेंटर्स की कई शाखाएं हैं, उन्हें हर शाखा के लिए अलग-अलग रजिस्ट्रेशन कराना होगा इसके लिए सरकार एक वेब पोर्टल बनाएगी।

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