
लखनऊ। सेवा का भाव व्यक्ति को जीवन में सर्वाधिक आत्म संतोष प्रदान करने के साथ साथ आत्म प्रेरणा का भाव भी जागृत करता है। आज का सबसे बड़ा मंदिर , मस्जिद और गुरुद्वारा वह स्थान है , जो मानव कल्याण के लिए काम करता हैं। इससे महान जगह और क्या हो सकती है जहाँ फ़ूडमैन विशाल सिंह के नेतृत्व में विजय श्री फाउंडेशन , प्रसादम सेवा के तत्वाधान में सैकड़ों जरुरतमंद प्रतिदिन भोजन प्रसाद को ग्रहण करते हैं।

श्रीमती विभा श्रीवास्तव जी ने अपने पूरे परिवार के साथ मेडिकल कॉलेज , लखनऊ में अपने प्रिय पोतों चिरंजीवी अथर्वशीष श्रीवास्तव और हृदयम आदित्य श्रीवास्तव के मुंडन संस्कार के उपलक्ष्य में भूख से करुणा कलित एवं क्रन्दित निःसक्त तीमारदार एवं उनके बच्चों को भोजन प्रसाद का वितरण कर इन गरीब ,असह्य एवं लाचार लोगो की सेवा पूरे मनोयोग के साथ करते हुए , नर में ही नारायण स्वरुप के दर्शन किये । क्योंकि नर सेवा ही नारायण सेवा है ,सेवा का भाव व्यक्ति को जीवन में सर्वाधिक आत्म संतोष प्रदान करने के साथ साथ आत्म प्रेरणा का भाव भी जागृत करता है।

मित्रों ,श्रीमती विभा श्रीवास्तव जी का मानना है कि मानव समाज में सबसे कमजोर ,दबे ,कुचले ,गरीबों और जरूरतमंद लोगों की सेवा ही असली पूजा है । वास्तव में सेवा भाव है , कर्म नहीं । इस कारण प्रत्येक परिस्थिति में योग्यता ,रूचि तथा सामर्थ्य के अनुसार सेवा हो सकती है ।सच्चे सेवक की दृष्टि में कोई भी गैर नहीं हो सकता । यदि ये गरीब नारायण है तो इनकी सेवा के बिना संसार रूपी समुद्र से तरना आसान नहीं हो सकता।

विजय श्री फाउंडेशन के संस्थापक फूडमैन विशाल सिंह ने चिरंजीवी अथर्वशीष श्रीवास्तव और आदित्य हृदयम श्रीवास्तव को मुंडन संस्कार के शुभ अवसर पर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि विनम्रता मनुष्य के व्यवहार को उजागर करती है। जीवन में भूख ही सबसे बड़ा दुख हैं, रोग हैं, तड़प हैं ,इसलिए भोजन प्रसाद सेवा के पुण्य कार्य में श्रीमती विभा श्रीवास्तव जी ने प्रतिभाग करते हुए गरीब , असह्य , भूख से तडफते और करुणा कलित चेहरों पर मुस्कान लाने का जो प्रयास किया है , इसके लिए आपके पूरे परिवार को मेरा कोटि-कोटि वंदन एवं मैं मां अन्नपूर्णा एवं माता लक्ष्मी से प्रार्थना करता हू कि आप और आपका परिवार हमेशा धन- धान्य से परिपूर्ण रहे , आप इसी तरह से मुस्कराते हुए लोगो की सेवा करे । यही पुण्यों का फिक्स डिपॉज़िट है ।