‘अबकी बार 400 पार, तीसरी बार मोदी सरकार’ के नारे के साथ भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट चुकी है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होगी उसके बाद नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के नियम को अधिसूचित किया जा सकता है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही सीएए के नियम को लागू किया जा सकता है। वहीं, केंद्र सरकार सीएए के नियम को जल्द जारी करने जा रही है।
देश में सीएए को लागू होने से कोई रोक नहीं सकता: अमित शाह
सीएए के कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश भारत आए प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारत की नागरिकता दी जाएगी। बता दें कि कुछ दिनों पहले पश्चिम बंगाल में अमित शाह ने भाजपा नेताओं की एक बैठक में कहा था कि देश में सीएए को लागू होने से कोई रोक नहीं सकता है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था कि सीएए को लागू करना भाजपा की प्रतिबद्धता है।
बता दें कि इस साल 2019 के दिसंबर महीने में संसद से सीएए कानून को पारित कर दिया गया था। इस कानून को संसद से पारित किए जाने के बाद दिल्ली समेत कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।
हम जल्द ही सीएए के लिए नियम जारी करने की योजना बना रहे: अधिकारी
एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा, “हम जल्द ही सीएए के लिए नियम जारी करने की योजना बना रहे हैं। इन नियमों के जारी होने के साथ, कानून को अमल में लाया जा सकता है, जिससे पात्र व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की अनुमति मिल सकेगी।” गृह मंत्रालय, सीएए नियमों को अधिसूचित करेगा।
अधिकारी ने आगे कहा,”सीएए के कार्यान्वयन में चार साल से अधिक की देरी हो चुकी है, इसलिए इसके संबंधित नियमों को तैयार करना आवश्यक हो गया है।
जब उनसे अप्रैल-मई में संभावित लोकसभा चुनाव से पहले सीएए नियमों को अधिसूचित किए जाने की संभावना के बारे में पूछा गया, तो अधिकारी ने कहा कि वास्तव में, उससे काफी पहले ही सीएए के नियम को लागू किया जाएगा।
आवेदकों को यात्रा दस्तावेज के करनें होंगे कुछ खुलासे
अधिकारी ने आगे बताया कि पूरी प्रक्रिया के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल पहले से ही स्थापित किया गया है, जिसे डिजिटल रूप से संचालित किया जाएगा। आवेदकों को बिना किसी यात्रा दस्तावेज के भारत में अपने प्रवेश के वर्ष का खुलासे करने होंगे। आवेदक को किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। बताते चलें कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी समेत कई राजनीतिक दल सीएए का विरोध कर रहे हैं।