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भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बरसात का पानी जमीन में जाना जरुरी : स्वतंत्र देव सिंह

बुधवार सुबह से शुरु हुई जल बचाने का संदेश देने की मुहिम प्रयागराज, बांदा, चित्रकूट, सुल्तानपुर, बलरामपुर, गौतमबुधनगर, संभल, गाजीपुर, हापड़, गोण्डा समेत राज्य के सभी जिलों में देर शाम तक जारी रही

लखनऊ। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने बुधवार को विश्व जल दिवस पर प्रदेश भर में जल संचयन और जल संरक्षण का संदेश देने के लिए लखनऊ के कुड़ियाघाट से जल मार्च निकाला। वही बाराबंकी के मजीठा ग्राम पंचायत में जल जागरूकता चौपाल लगी।

इस दौरान जल बचाने का संकल्प बड़ी संख्या में लोगों को दिलाया गया। गोण्डा के सरकारी स्कूलों में लगी जल जागरूकता कक्षाओ में स्कूली बच्चों ने जल है तो कल है और बूंद-बूंद जल बचाना है जैसे नारे लगाए।

बुधवार सुबह से शुरु हुई जल बचाने का संदेश देने की मुहिम प्रयागराज, बांदा, चित्रकूट, सुल्तानपुर, बलरामपुर, गौतमबुधनगर, संभल, गाजीपुर, हापड़, गोण्डा समेत राज्य के सभी जिलों में देर शाम तक जारी रही।

आयोजनों के दौरान ग्रामीणों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को जल से संबंधित विभिन्न पहलुओं जैसे सुरक्षित पेयजल, भूजल पुनर्भरण, जल संरक्षण, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल की उपयोगिता और विशेषता का  महत्व बताया गया।

राज्य के सभी जिलों में जल जागरूकता कार्यक्रमों का शुभारंभ बाराबंकी में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के हरी झण्डी दिखाने के साथ हुआ। स्थानीय लोगों और सामाजिक संस्थाओं ने नदियों किनारे जल मार्च निकाले। ग्राम पंचायत स्तर पर जल जागरूकता चौपाल हुईं और सरकारी स्कूलों में जल जागरूकता कक्षाएं लगाई।

जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ग्राम पंचायत मजीठा पहुंचकर जल उत्सव में भाग लिया। उन्होंने यहां कहा कि पानी नहीं मिलेगा तो जीवन नहीं बचेगा। इसलिए जल बचाना हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि बरसात का पानी जमीन के अंदर जाए, घर का पानी सोख्ता के रूप में जमीन में जाए तभी जल बचेगा।

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कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को जल संरक्षण और जल संचयन के महत्व की जानकारी दी। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर से हर घर तक जल पहुंचाने की योजना से ग्रामीणों को मिल रहे लाभ  भी बताए।

आयोजन में पानी जांच का काम कर रही महिलाएं, आईएसए एजेंसी के कार्यकर्ता, पीएमसी के प्रमुख, जल निगम के अधिकारी समेत स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

राजधानी लखनऊ में सुबह साढे आठ बजे गोमती किनारे कुड़ियाघाट पर आईएसए कार्यकर्ताओं ने स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों के साथ नदी किनारे दो किमी पैदल चल कर जल मार्च निकाला। जल संरक्षण पर काम करने समाजसेवियों ने गीतों और कविता के माध्यम से जन-जन तक जल जागरूकता की जानकारी दी।

राज्य के अन्य जिलों में भी इस तरह के आयोजन हुए। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक सरकारी स्कूलों में जल जागरूकता कक्षाओं का आयोजन किया गया जिसमें अध्यापकों और स्कूली बच्चों ने भाग लिया।

बच्चों ने जल जागरूकता से संबंधित प्रश्न पूछे गये। विभिन्न खेलों के माध्यम से जल संचयन और जल संरक्षण का महत्व बताया गया।

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